126 कम नींद लेना है दिल के लिए खतरे की घंटी, अभी से हो जाईये सावधान

 कम नींद लेना है दिल के लिए खतरे की घंटी, अभी से हो जाईये सावधान



मनुष्य के लिए सोना उतना ही जरूरी है, जितना की जीवित रहने के लिए भोजन. दरअसल, हमारा शरीर लगातार काम करने से थक जाता है. ऐसे में शरीर को आराम देना अति आवश्यक है. यदि हम शरीर को काम से ब्रेक नहीं देते तो थकावट धीरे धीरे बिमारियों का रूप धारण कर लेती है जोकि आगे चल कर हमारे लिए मुसीबत बन सकती है. एक आम मनुष्य के लिए कम से कम 6 से 7 घंटे की नींद लेना आवश्यक है. यदि आप इससे कम सोते हैं तो इसका सीधा असर आपके हृदय पर पड़ सकता है जिससे दिल के दौरे का पड़ना जैसे खतरे आपके सामने आ सकते हैं.

हर उम्र वर्ग के व्यक्ति के लिए विज्ञान ने नींद का समय तय किया है. इस समय से कम नींद लेने से हमे कईं तरह के रोगों का सामना करना पड़ सकता है. यदि आप लगातार काम करने के बाद रात में कम सोते हैं या फिर सात घंटे से कम नींद लेते हैं तो आप अपने दिल को बीमार कर रहे हैं. हाल ही में किये गये एक शोध में यह बात सामने आई है कि कम नींद मनुष्य के लिए जानलेवा साबित हो सकती है. शोधकर्ताओं का कहना है कि जो लोग सात घंटे से कम नींद लेते हैं, उनमें दिल की बीमारी (सीवीडी) और कोरोनरी हृदय रोग विकसित होने का खतरा ज्यादा रहता है.

पत्रिका एक्सपेरिमेंटल फिजियोलॉजी में प्रकाशित एक आर्टिकल में लिखित अनुसार, जो लोग रात में सात घंटे से कम सोते हैं उनके शरीर के तीन नियामकों या माइक्रोआरएनए का रक्त स्तर निम्न होता है. यही माइक्रोआरएनए जीन मनुष्य के शरीर को बुरी तरह से प्रभावित करते हैं और साथ ही संवहनी के स्वास्थ्य को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.

अमेरिका के जाने माने कोलोराडो विश्वविद्यालय के एक प्रोफेसर क्रिस्टोफर डेसूजा ने नींद को लेकर अपनी रिपोर्ट पेश की. इस रिपोर्ट में उन्होंने कहा कि, “यह शोध एक नए संभावित तंत्र की ओर इशारा करता है, जिसके अनुसार नींद दिल के स्वास्थ्य और समग्र शरीर क्रिया विज्ञान को प्रभावित करती है.”

प्रोफेसर डिसूजा के अनुसार उन्होंने अपने इस शोध 44 से 62 वर्षीय लोगो के अलग अलग समूह को शामिल किया था. इसमें औरतें और मर्द दोनों शामिल किये गये थे. शोधकर्ताओं ने इन सब से नमूना लिया, जिसमें नींद संबंधी उनकी आदतों के बारे में उनसे एक प्रश्नावली भरवाई गई.

आधे प्रतिभागी रात में सात से 8.5 घंटे सोते थे, बाकी आधे लोग हर रात पांच से 6.8 घंटे सोते थे. अनुसंधान टीम ने पहले से संवहनी के स्वास्थ्य से जुड़े नौ माइक्रोआरएनए की अभिव्यक्ति को मापा.

शोध के दौरान यह बात साफ़ पायी गई कि जो लोग सात घंटे से कम सोते हैं उनका एमआईआर-125ए, एमआईआर-126, और एमआईआर-14ए की मात्रा पर्याप्त नींद लेने वाले लोगों की तुलना में 40 से 60 प्रतिशत कम था.








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